हिंदी ख़बरें
दहेज देने वाले भी रहें खबरदार PDF Print E-mail
(2 Votes)
Written by राजेश चौधरी   
Monday, 01 March 2010 17:16

नई दिल्ली।। दहेज निरोधक कानून का इस्तेमाल कम होने के कारण ही दहेज से संबंधित मामलों में बढ़ोतरी हुई है। जानकारों का कहना है कि अगर 1961 में बना दहेज निरोधक कानून का सही तरीके से पालन किया जाए तो दहेज जैसी कुरीतियों पर काफी हद तक अंकुश लगेगा क्योंकि इस कानून के तहत न सिर्फ दहेज लेना जुर्म है बल्कि दहेज देना भी जुर्म है।

समाज में दहेज जैसी कुरीति को खत्म करने के लिए 1961 में कानून बनाया गया। हालांकि बाद में आईपीसी में संशोधन कर धारा-498 ए बनाया गया जिसके तहत पत्नी को प्रताडि़त करने के मामले में सजा का प्रावधान किया गया। साथ ही लड़की का स्त्रीधन रखने के मामले में अमानत में खयानत का केस दर्ज करने का प्रावधान है।


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झूठी FIR लिखाई तो 10 साल की सजा! PDF Print E-mail
(2 Votes)
Written by भाषा   
Wednesday, 30 December 2009 16:23

नई दिल्ली ।। पुलिस थाने में झूठी एफआईआर दर्ज कराने वाले व्यक्ति को 10 साल तक की जेल की सजा दिलाने के लिए सरकार आईपीसी में संशोधन पर विचार कर रही है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सरकार को उम्मीद है कि रंजिश या निहित स्वार्थों के कारण किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले व्यक्ति को इस प्रावधान का डर रहेगा।

सरकार के इस प्रस्तावित कदम का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि हाल ही में गृह मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि शिकायतों को एफआईआर की तरह समझा जाए।


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क्या समझौते पर टिकी हैं ज्यादातर शादियां? PDF Print E-mail
(1 Vote)
Written by पूनम पाण्डे   
Monday, 28 December 2009 16:34

शादी का लड्डू ऐसा, जो न खाए ललचाए और जो खाए पछताए। क्या इंडियन मैरिज के लिए यह बात सही साबित हो रही है? हाल ही में आई एक किताब के लिए 12 साल तक की गई स्टडी के नतीजे तो कम से कम यही दिखाते हैं। इसके मुताबिक शहरी इलाकों के 94 पर्सेंट मिडल क्लास कपल्स ने माना कि वे अपनी शादी से खुश हैं लेकिन ज्यादातर ने यह भी माना कि अगर दोबारा चॉइस दी जाए तो वे इस पार्टनर से शादी नहीं करेंगे या फिर शादी ही नहीं करेंगे।

डॉ. शेफाली संध्या की किताब 'लव विल फॉलो- वाय द इंडियन मैरिज इज बर्निंग' में कहा गया है कि पिछले दो दशकों में इंडिया में तलाक के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। केरल में 350 पर्सेंट, चेन्नै और कोलकाता में 200 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई वहीं दिल्ली इन सबमें सबसे आगे है और 'तलाक कैपिटल' की तरह उभर रही है। तलाक के ज्यादातर केस 25 से 39 साल की उम्र के बीच में होते हैं। स्टडी के मुताबिक जहां अमेरिका में तलाक के 66 पर्सेंट मामलों में पहल महिलाओं की ओर से होती है, वहीं इंडिया में अब 80-85 पर्सेंट मामलों में महिलाएं तलाक की पहल करती हैं। वैसे, अब तक यह धारणा थी कि पुरुष ही तलाक की पहल करते हैं।


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पत्नियों से ज्यादा पीड़ित पति करते हैं आत्महत्या PDF Print E-mail
(3 Votes)
Written by संजय स्वदेश   
Sunday, 22 November 2009 00:06

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अभी तक ज्यादातर महिलाओं पर अत्याचार के मामले सामने आते रहे हैं। इसे रोकने के लिए सशक्त कानून भी बनाए गए हैं। समय बदल रहा है। महिला सशक्तिकरण के जमाने में अब पति पत्नी से पीडि़त हैं। चाहे वे पत्नी के लगाए गए दहेज प्रताडऩा और घरेलू हिंसा के झूठे आरोप हों या फिर घर में आपसी कलह। पत्नी पीिड़ता कहां जाए? न कोई हमदर्दी न कोई सरकारी मदद। नतीजा? पीड़ित पतियों के आत्महत्या का अनुपात पीड़ित पत्नियों से दोगुना है.

इस तथ्य पर बाद में आते हैं लेकिन पहले आपको यह बताते हैं कि 19 नंवबर को तंग पति अंतरराष्ट्रीय पति दिवस के रूप में मनाते हैं। पार्टी करके। बैठक करके। फिल्म देखकर। कुछ पीड़ितों का समूहिक पिकनिक मनाकर एक दिन खुशियों को जी रहे हैं। अपने लिए शायद वैसा दिन पत्नी के साथ फिर कभी नहीं जी पाएंगे। हकीकत बदल रही है। यकीन मानिये जितनी हिंसा महिलाओं के साथ हो रही है, वैसी ही हिंसा पुरुषों के साथ हो रही है। दो वर्ग बन गए हैं। एक ओर जहां पति पत्नी को पीटता है, वहीं दूसरे वर्ग में पत्नी से पति पीडित होकर दिल में टीस लिए जिंदगी से हर आस छोड़ रहा है।

पहली बार त्रिनिदाद और टोबैगो में 1999 में 19 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस के रूप में मनाया गया। भारत में इसी शुरुआत 2007 से हुई। पत्नी से प्रताडि़त होने के मामले में देश का कोई शहर अछूता नहीं है। बस अंतर इतना है कि महिलाओं से जुड़ी हिंसा को मीडिया ज्यादा कवरेज देता है। पीड़ित पति शर्म संकोच से कहीं नही जाते हैं। करीब डेढ़ दशक पूर्व दिल्ली के विभिन्न इलाकों में कई जगह लिखा हुआ मिलता था - पत्नी सताएं तो हमे बताएं, मिले नहीं लिखें। अब वो तख्ती तो नहीं दिखती है, लेकिन पीड़ित बढ़ गए हैं.


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सूइसाइड की धमकी भी तलाक का आधार PDF Print E-mail
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Written by PTI   
Friday, 12 February 2010 11:25

सूइसाइड की धमकी भी तलाक का आधार

मुंबई।। बार-बार आत्महत्या की कोशिश करना या ऐसा करने की धमकी देना भी 'क्रूरता' के समान है और इसे तलाक हासिल करने की एक ठोस वजह माना जा सकता है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने यह व्यवस्था दी है।

हाई कोर्ट ने पारिवारिक अदालत के एक फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह व्यवस्था दी। पुणे की पारिवारिक अदालत ने वर्षा और प्रकाश (दोनों नाम बदले हुए) के बीच तलाक की मंजूरी दी थी। पति प्रकाश ने 2002 में पारिवारिक अदालत में तलाक की अर्जी दी थी। लेकिन पारिवारिक अदालत के फैसले के खिलाफ वर्षा ने अपील की। दोनों पिछले 17 साल से अलग रह रहे हैं।


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बीवी दे पति को आर्थिक मदद: सुप्रीम कोर्ट PDF Print E-mail
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Written by PTI   
Tuesday, 29 December 2009 23:19

नई दिल्ली ।। सुप्रीम कोर्ट ने कानून के शब्दों के बजाय उसकी भावनाओं को अहमियत देते हुए तलाक के एक मामले में पत्नी को निर्देश दिया क ि वह मुकदमा लड़ने के लिए पति को 10,000 रुपए दे। अदालत ने गौर किया कि पति बेरोजगार है जबकि पत्नी स्वतंत्र लेखन करती है। आम तौर पर सीआरपीसी की धारा 125 के तहत तलाक के मुकदमे के दौरान यह पति का कर्तव्य माना जाता है कि वह पत्नी को या उसके माता-पिता को मुकदमे के दौरान या तलाक के बाद गुजारा भत्ता दे।

जस्टिस दलवीर भंडारी की अध्यक्षता वाली बेंच ने मद्रास निवासी संतोष के स्वामी और बेंगलुरु में रहने वाली उनकी पत्नी इनेश मिरांडा के मामले की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।मिरांडा ने चेन्नै अदालत में स्वामी द्वारा दायर एक मुकदमे की सुनवाई बेंगलुरु अदालत में स्थानांतरित करने की याचिका दायर की थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह ऐतिहासिक आदेश दिया।


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पति के काले रंग से छूटा सात जन्मों का साथ PDF Print E-mail
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Written by Navbharat Times   
Friday, 18 December 2009 20:25

गाजियाबाद: हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं... गाने की चंद लाइनें इस समय वह पति जरूर गुनगुना रहा होगा, जिसका आरोप है कि उसकी पत्नी ने उसे इसलिए छोड़ दिया क्योंकि उसका रंग काला है। वहीं पत्नी का कहना है कि उसका पति उसके साथ मारपीट करता है इसलिए वह उसके साथ नहीं रह सकती। यह मामला पुलिस परामर्श केंद्र में सामने आया है। केंद्र के अधिकारियों की दिक्कत यह है कि वह इस मामले को सुलझाएं भी तो कैसे। हालांकि इस मामले में कई बार दोनों को एक साथ सुलह करने के लिए बिठाया भी जा चुका है।

भाटिया मोड़ के पास दौलतपुरा में रहने वाली युवती की शादी नवंबर 2008 में शाहदरा (दिल्ली) में रहने वाले युवक के साथ हुई थी। युवती के माता-पिता न होने के कारण नाना-नानी ने ही शादी की रस्म पूरी की थी। गीजर और एसी कारीगर युवक का रंग काला था, जबकि युवती गोरी थी। उस समय युवती ने कुछ नहीं कहा और उनका विवाह हो गया। लेकिन कुछ महीने बाद छोटी-छोटी बातों पर दोनों के बीच विवाद होने लगा। इस कारण विवाह के 3 महीने बाद ही युवती अपने घर आ गई थी।


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हमारी भी सुनें PDF Print E-mail
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Written by Dainik Bhaskar   
Friday, 20 November 2009 12:20

News in Dainik Bhaskar:

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